Desi Boy Shayari in Hindi

Desi Boy Shayari

Desi Boy Shayari in Hindi

कुछ लोग होते हैं… जिनमें शहर की चकाचौंध नहीं, पर गांव की मिट्टी की खुशबू होती है।
उनकी हंसी में एक सच्चाई, उनकी आंखों में साफ़ आसमान, और उनके दिल में वो देसीपन… जो किसी भी दिल को अपना बना ले।
आज मैंने सोचा, क्यों न तुम्हारे लिए लिखूं कुछ Desi Boy Shayari in Hindi — वैसे लड़के के लिए, जो दिल से भी सच्चा है और स्टाइल से भी।

देसी लड़के की सादगी पर शेर

हमारी पहचान हमसे ही है,
किसी और से नहीं,
हम देशी हैं
हमें विदेशी बनने का कोई शौक नहीं।

देशी में जो बात है,
वो विदेशी में कहा,
अपनों में जो प्यार है,
वो परायों में कहा।

मंज़िल नहीं मुझे तो राह से मिलना है,
दुनिया के साथ किसे जीना है,
मुझे तो Attitude में जीकर शान से मरना है।

बात लगाव और एहसास की है,
वरना कॉल और मैसेज तो
कम्पनी वाले भी करते है।

देशी में जो बात है, वो विदेशी में कहा,
अपनों में जो प्यार है,वो परायों में कहा।

सुधरी हे तो बस मेरी आदते, वरना मेरे शौक,
वो तो आज भी तेरी औकात से ऊँचे हैं।

आदत नहीं है फ़ालतू बात करने की
और लोग इसे मेरी अकड़ समझ लेते है।

हम समंदर हैं, हमें खामोश ही रहने दो,
ज़रा मचल गये तो, शहर ले डूबेंगे।

जलने लगा है जमाना सारा,
क्योंकि चलने लगा है नाम हमारा

हम तो दुश्मनी भी दुश्मन की औकात देख कर करते हैं,
बच्चों को छोड़ देते है और बड़ों को तोड़ देते हैं।

दौलत तो विरासत में मिलती है,
लेकिन पहचान अपने दम पर बनानी पड़ती है।

जिन्दगी जीते है हम शान से,
तभी तो दुश्मन जलते है हमारे नाम से।

गांव की खुशबू वाला प्यार

तेरे साथ चलूं तो हवा भी ठंडी लगती है,
जैसे खेतों से होकर आ रही हो।

तेरी बातें वैसी हैं,
जैसे मिट्टी की खुशबू पहली बारिश में।

तेरी आंखों में देखा,
तो बचपन के गांव की गलियां याद आ गईं।

तेरे हाथों का स्पर्श,
जैसे कच्ची मिट्टी पर नंगे पांव चलना।

तेरे साथ बैठकर लगता है,
जैसे पुराने नीम के पेड़ की छांव मिल गई हो।

तेरे साथ हर पल में,
गांव का वो सुकून है जो शहर में नहीं मिलता।

तेरी मुस्कान…
वैसी है जैसे खेतों में खिले सरसों के फूल।

तेरे साथ बिताए लम्हे,
जैसे बैलगाड़ी की धीमी-धीमी सवारी।

तेरा प्यार…
गांव के तालाब की ठंडी हवा जैसा है।

तू मेरे लिए वही है,
जैसे गांव के मेले में मिल जाने वाली पहली मिठाई।

देसी अदा का जादू

ना जिम, ना प्रोटीन शेक,
उसकी मेहनत ही उसके बाजुओं की ताकत है।

हमे अपनी महफ़िलो में न बुलाया कर मेरे यार,
मुझे तो आज भी फर्स पर बैठ कर खाने की आदत है।

देशी व्यक्तित्व है और देशी बातें हैं हमारी,
हिंदी आती है हमें अंग्रेजी कमजोर है हमारी।

तू शहर की पढ़ी लिखी लड़की,
में छोरा गांव का गवार,
तू चलाती हैं स्कूटी,
में रहता बुलेट पे सवार।

कुछ भी हो असली सुकून तो गांव में ही मिलता है,
क्योंकि यहां लोग और खाना दोनों असली मिलते हैं।

शाखाओं से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,
इन आँधियों से कह दो
ज़रा अपनी औकात में रहे।

गांव से हूँ गवार मत समझना,
सुन्दर नही हूँ इतना,
पर दिल का बेकार मत समझना।

देसी सूँ , गवार नी!
माँई-बापू का लाल सूँ ,
किसी पापा की परी का गुलाम नी।

कदम वही थम जाते है हुजूर,
जहाँ कोई कह देता है,
रुकिए जरा चाय पी लीजिये।

होते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते,
कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नहीं होते।

होते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते,
कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नहीं होते।

सच्चाई और देसीपन का मेल

शहर वालों को लगता है वो सीधा है,
पर असल में वो सबसे बड़ा खिलाड़ी है।

चेहरे पर सादगी, दिल में सच्चाई,
यही है असली देसी अदाई।

सच्चाई से सजी जब देसी मुस्कान होती है,
वो हर दिल की जान होती है।

ना दिखावा, ना झूठ का खेल,
बस सच्चाई और देसीपन का मेल।

मिट्टी की महक और आंखों की सच्चाई,
दोनों मिल जाएं तो बनती है रब की खुदाई।

देसी दिल, सच्ची जुबां,
यही है ज़िंदगी का असली जहां।

सच्चाई जब देसीपन में घुल जाती है,
तो मोहब्बत खुद चलकर आती है।

सादा कपड़े, साफ दिल,
यही है देसी स्टाइल का असली सिलसिला।

ना ऊंची बातें, ना बड़े सपने,
सच्चाई और देसीपन ही अपने।

देसीपन में सच्चाई का रंग चढ़ जाए,
तो इंसान हर दिल को भा जाए।

सच्चाई और देसीपन जब एक साथ मिल जाएं,
तो दुनिया भी कहे – ऐसे लोग कम मिल पाएं।

देसी लड़के का प्यार

वो ‘आई लव यू’ नहीं कहता,
बस अपनी आंखों से जताता है।

बदलना फितरत हो गई इंसान की वक्त पर,
अपने अच्छे वक्त पर,
दूसरो के बुरे वक्त पर।

देसी काढ़े में ही मिलता,
सूप-वूप में क्या मज़ा है
तू क्या जाने छाँव ढूढने वाले धूप में क्या मज़ा है।

मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है,
ज़िद तो उसकी है जो लकीरों में लिखा ही नही।

मुझ से दोस्त नहीं बदले जाते चाहे हो लाख दूरी,
यहां लोग भगवान बदल देते है, बस एक मुराद पूरी न होने पर।

आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले,
जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए।

खता बस इतनी है अपनी, सादे देशी और नादान है हम,
और कोई अपना जुर्म नही।

समझने के लिए दिल नही दिमाक चाहिए,
जिनको हमसे आपत्ति हो वो हमसे दूर रहिए।

जब गाँव मे मकान नहीं कच्चे घर हुआ करते थे,
जो गर्मी में ठंडे और सर्दियो में गर्म हुआ करते थे।

एक बार दिल से उतर जाने वाले लोग,
सामने खड़े रहे तो भी नजर नहीं आते।

मेरे गांव की मिट्टी से भरता है तेरे शहर का पेट,
और तेरे शहर वाले गाँव वालों को गवार कहते हैं।

मैं शिकायते भी किससे करूँ, सब किस्मतों की बात है,
तेरी सोच में भी नहीं हूँ मैं, मुझे लफ्ज़ लफ्ज़ तू याद हैं

हक तो इतना है कि मैं तुझे तुझसे चुरा लू,
पर क्या है ना कि मुझे चोरी आती नहीं।

Main Zoya hoon…
pichhli baar maine “Love Shayari Meri Jaan” likhi thi, aur ab tumhare liye yeh Desi Boy Shayari laayi hoon.

कभी-कभी… शहर में रहकर भी, देसी लड़का अपने गांव, अपनी मिट्टी और अपनी सादगी को साथ लेकर चलता है।
और यही बात उसे सबसे खास बनाती है।

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