Best X Bf Ke Liye Shayari
कभी सोचा नहीं था कि जिसको मैंने अपनी दुनिया समझा,
वो एक दिन मेरे लिए सिर्फ़ एक कहानी बन जाएगा।
कभी मोहब्बत में लिखी पंक्तियाँ आज तन्हाई में जल रही हैं…
और हाँ, आज की ये बातें… X Bf ke liye Shayari ही हैं,
जिसमें मोहब्बत भी है, ताना भी… और वो अधूरी सी मुस्कान भी।
जब रिश्ता था, तब इज़्ज़त थी…
एक दर्द छुपा हो सीने में,तो मुस्कान अधूरी लगती है ।
जाने क्यों बीन तेरे, मुझको हर शाम अधूरी लगती है ।
फुरसत नहीं मिलती जरा सा याद करने की
इस्तेमाल करो कह दो हम उसकी याद मैं फुरसत से बैठे हैं।
न जाने आज भी मुझे तेरा इंतज़ार क्यों है
बिछुड़ने के बाद भी मुझे तुझसे प्यार क्यों है कभी तुम्हारी याद आती है
जब रिश्ता था, तब इज़्ज़त थी, अब तो बस नाम का वास्ता है…
पहले दिल से पुकारते थे, अब औपचारिकता का रास्ता है।
रिश्ता था तो आदर भी था, हर लफ़्ज़ में मिठास थी,
अब दूरी का आलम है, और चुप्पियों में उदास थी।
जब रिश्ता था, तो आँखों में अपनापन था, अब सिर्फ़ नज़र फेर लेना ही काफ़ी है,
पहले छोटी सी ख़ुशी में शामिल थे, अब बड़ी तकलीफ़ में भी ग़ैर काफ़ी है।
तो कभी तुम्हारे ख़ैब आते हैं…
मुझे सताने के सलीके तो तुम्हें बेहिसाब आते हैं !!
सच्ची मोहब्बत एक जेल के कैदी की तरह होती है
जिसमें उम्र बीत भी जाती है और सजा भी पूरी नहीं होती है !
कर रहा था गम-ऐ-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आये कितनी नादान है ये मेरी आँख के आँसू
जब भी तेरी याद आती है
इनका भी घर मैं मन नहीं लगता।
मैं वहां जाकर भी मांग लूं तुझे,
कोई बता दे कुदरत के फैसले कहां होते हैं !
इज़्ज़त और प्यार तो साथ चले थे, रिश्ता टूटते ही दोनों बिछड़ गए,
आज अजनबी हैं हम, कल तक जो एक-दूजे के बिना बिखर गए।
रिश्ता था, तो हर गलती माफ़ थी, अब एक भूल भी गुनाह हो गई,
पहले जो हँसी में टल जाती थी, अब वही बातें सज़ा हो गई।
जब रिश्ता था, तो बात करने के बहाने थे, अब सिर्फ़ न बोलने के अफ़साने हैं,
कल जो पास बैठते थे, आज दूर रहने के ठिकाने हैं।
झूठ का स्वाद और सच्चाई का ज़हर
झूठ का स्वाद मीठा है, बस पल भर के लिए,
सच्चाई का ज़हर उम्र भर की राहत दे के जाता है।
लोग झूठ को मिठाई समझ कर खाते रहे,
सच्चाई का ज़हर पीने की हिम्मत बस कुछ में पाई जाती है।
झूठ की मिठास मोह लेती है,
पर सच्चाई का ज़हर इंसान को आइना दिखा देता है।
बिन तेरे मेरी हर खुशी अधूरी है,
फिर सोच मेरे लिए तू कितनी जरूरी है !
कुछ तो बात है तेरी फितरत मैं ऐ दोस्त,
वरना तुझ को याद करने की
खता हम बार-बार एन करते!
खाब आंसुओं से, बहाए न गए;
एन जाने क्यों आप, भुलाये न गे!
इस मोहब्बत के रिश्ते को हम शिद्दत से निभाएंगे
साथ अगर तुम दो तो हम दुख को भी हराएंगे !
अब जुदाई के सफर को मेरे आसमां करो तुम मुझे खाब
मैं आ कर ना परेशान करो आज फिर मुमकिन नहीं की
तुमने झूठ को शहद की तरह परोसा, और मैंने सच्चाई को ज़हर की तरह पिया।
तुम जीत गए झूठ से… पर मैं हारकर भी मोहब्बत में सच्ची रही।
जिसे देख कर दिल धड़कना भूल जाता था, आज उसे देख कर दिल हँसना सीख गया है।
शुक्रिया… क्योंकि तुम्हारे जाने के बाद मैंने खुद से प्यार करना सीख लिया।
आया ही था ख्याल के आंखें छलक पड़ी
आंसू तुम्हारी याद के कितने करीब थे।
एक अजीब सी बेताबी है तेरे बिन रह भी लेते हैं और रहता भी नहीं जाता,
एक तेरी याद का आलम कि बदलता ही नहीं वरना वक्त आने पर हर चीज बदल जाती है।
जो झूठ के स्वाद के आदी हैं,
वो सच्चाई का एक घूंट भी नहीं पी सकते।
झूठ मीठा है, इसलिए बिकता है,
सच कड़वा है, इसलिए छुपा दिया जाता है।
कभी याद आए… तो बस इतना सोच लेना
कभी याद आए… तो बस इतना सोच लेना,
कोई चुपके से आज भी तुम्हारे नाम पर मुस्कुरा लेता है।
कभी याद आए… तो बस इतना सोच लेना,
जिसे खो दिया था, वो आज भी तुम्हें अपना मानता है।
कितना चाहते हैं तुमको ये कभी कह नहीं पाते,
बस इतना जानते हैं, की तेरे बिना रह नहीं पाते !
कभी याद आए… तो बस इतना सोच लेना,
मेरी खामोशी में भी तुम्हारा नाम बसता है।
जा अग्ना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है
कौन कहता है इश्क एक बार
होता है जितनी बार देखता हूं
तुम्हें हर बार होता है!
तुम पल भर के लिए डर क्या जाते हो
तो हम ‘बिखरने’ से लगते हैं तुम से बिछड़ कर भी तुम्हें
भूलना आसान ना थातुम्हें याद किया,
तुमको भूलने के लिए.
Zmaane Ke Savaalon Ko Main, हस के ताल दुन फ़ाराजलेकिन
नमी आँखों की कहती है, मुझे तुम याद आते हो।
कभी याद आए… तो बस इतना सोच लेना,
कोई बिना वजह तुम्हारी दुआ माँग रहा है।
रिश्ता था तो लोग मिसाल देते थे, अब हम बस एक किस्सा बन गए,
कल जो साथ जीने की कसम थी, आज उसी से बेवफ़ा बन गए।
जब रिश्ता था, तब इज़्ज़त थी, तूफ़ानों में भी साथ था,
अब तो बस यादें हैं, जो रेत की तरह हाथ से निकल गईं…
Main Zoya hoon…
पिछली बार मैंने “Ladka Ladki Friendship Shayari“लिखी थी,
जहाँ हर अल्फाज़ में मोहब्बत थी, हर ख्वाब में किसी का नाम था,
और हर रात की तन्हाई में सिर्फ एक ही चेहरा था।
आज की ये लाइने थोड़ी अलग हैं… इनमें मोहब्बत भी है, कड़वाहट भी है,
कुछ सवाल हैं जिनके जवाब शायद तुम्हारे पास भी न हों, और थोड़ी सी राहत है… जैसे बारिश के बाद की मिट्टी की खुशबू —
जिसमें यादें भी भीगी हैं और दर्द भी।
ये वो लफ़्ज़ हैं जो किसी ने खुलेआम नहीं कहे, लेकिन चुपचाप दिल में दबाकर रखे…
वो चुप्पी जो सब सुन लेती है, वो खामोशी जो सब कह देती है।


