Best Tea Par Shayari
कभी-कभी ज़िंदगी की भाग-दौड़ में न जाने क्यों दिल चाय की प्याली में सुकून ढूँढ लेता है। Best Tea Par Shayari लिखने बैठी हूँ तो एकदम से याद आ गया—कितनी बार तुमने कहा था, “ज़ोया, चलो एक कप चाय पीते हैं, मूड ठीक हो जाएगा।” सच कहूँ, शायद चाय सिर्फ़ स्वाद नहीं, वो एहसास है जो थकान, उदासी, यहाँ तक कि गुस्सा भी धीरे-धीरे पिघला देती है।
मुझे लगता है, चाय और मोहब्बत दोनों में एक ही बात कॉमन है—धीरे-धीरे घुलना, दिल को गरमाहट देना और हर घूँट के साथ कुछ गहरी बातें छोड़ जाना। जब मैं अकेली बैठकर चाय पीती हूँ, तो दिल खुद-ब-खुद शायर बन जाता है…
चाय और इश्क़ का रिश्ता
हलके में मत लेना तुम किसी के सावले रंग को,
दूध से ज्यादा कहीं देखे हैं शौकीन मैंने चाय के !
किसको बोलूँ हेलो और किसको बोलू हाय,
हर टेंशन की एक ही दवा…अदरक वाली चाय !
ये चाय अमीरी और गरीबी नहीं देखती साहब,
सबको एक सा सुकून देती है !
वो पल भी कोई पल है जिस पल तेरा एहसास ना हो
वो चाय फिर चाय कैसी जिसमें तेरे होठों सी मिठास ना हो।
चाय के बाद दूसरा रंग तुम्हारा है,
जो मुझे सांवला अच्छा लगता है
कुछ इस तरह से शक्कर को बचा लिया करो,
चाय जब पीओ हमें जहन में बिठा लिया करो।
हाथ में चाय और यादों में आप हो,
फिर उस खुशनुमा सुबह की क्या बात हो।
चाय की चुस्कियों में यादों को डुबाया करो,
ये दुनिया की बातों को खामखां दिल से ना लगाया करो।
ज़िन्हे चाय से लगाव होता है,
उसके दिल में जरूर घाव होता हैं।
शाम की चाय की आदत सी हो गई हो तुम,
लाख कोशिश कर लें छोड़ने की पर तलब लग ही जाती है।
इश्क चाय का इस कदर हावी है,
दिमाग ताला है और चाय चाबी है।
चाय की चुस्कियों में यादों को डुबाया करो,
ये दुनिया की बातों को खामखां दिल से ना लगाया करो।
अपनी मोहब्बत शाम की चाय की तरह होती जा रही है,
दिन-ब-दिन कड़क और स्वाद में लाजवाब।
सुबह फिर मेरी चाय ज्यादा मीठी हो गई
तुम यूं बार-बार मुझे याद न आया करो !
जब सुबह-सुबह तेरे प्यार के नग्मे को गुनगुनाता हूँ,
लब मुस्कुराते हैं जब चाय का कप उठाता हूँ।
आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया
आज फिर चाय में पत्ती नहीं डाली मैं ने !
न करना मेरी मोहब्बत पर शक ए-सनम हमने तुमसे सुबह की
चाय सा इश्क किया है जिसके न मिलने पर दिन अधूरा लगता है !
सुबह की पहली चाय पर शायरी
ये गरम चाय तो यूं ही बदनाम है,
दिल तो हमारा आपकी बेरुखी से जलता है !
महंगाई ने आशिकों को मार रखा है,
ये चाय ही है जिसने अभी तक संभाल रखा है !
ये चाय की मोहब्बत तुम क्या जानो,
हर घूँट में एक अलग ही नशा है !
माँ के हाथ की बनी चाय पीये हुए कई साल गुज़र गए,
चाय का वो स्वाद तो मिल गया लेकिन वो प्यार नहीं।
ये चाय की लत भी बड़ी खराब है,
तन्हाई में भी बस दिलाती तेरी याद है !
तेरी यादों का नशा है मुझे चाय की तरह
सुबह सबसे पहले तेरी ही याद आती है
न करना मेरी चाय पर शक ए-सनम, हमने तुमसे सुबह की चाय सा इश्क किया है,
जिसके न मिलने पर दिन अधूरा सा लगने लगता है।
एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास,
वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है।
सुबह की चाय और बड़ो की राये,
समय समय पर लेते रहना चाहिए।
तुम्हारे हाथों की बनी चाय के गर्म एहसासों की जरूरत है मुझे,
सुबह की सर्दी और तुम्हारी जुदाई हमसे अब बर्दाश्त नही होती।
तुम कॉफी मांगोगे तो हम चाय देंगे,
खूब उबल रही है जिंदगी हम भी हर घूंट का मजा लेंगे।
आज फिर उसकी यादों में ही खोए रह गए,
चाय तो पी ली पर बिस्किट धरे के धरे रह गए।
एक कड़क चाय और तुम काफी है
मेरी दिन भर की थकान मिटाने के लिए !
चाय की चुस्की के साथ अक्सर कुछ गम भी पीता हूं,
मिठास कम है जिंदगी में मगर जिंदादिली से जीता हूं।
गर्मी में भी सर्द हवा जैसी है,
मेरी चाय बिल्कुल दवा जैसी हैं।
मिलो कभी चाय पर फिर किस्से बुनेंगे,
तुम ख़ामोशी से कहना हम चुपके से सुनेंगे।
बारिश और चाय की शायरी
लोगों ने दारु को तो यूँही बदनाम किया है,
असली नशा तो चाय पीने में है !
बैठे चाय की प्याली लेकर पुराने किस्से गरम करने,
चाय ठंडी होती गई और आँखे भी नम !
उस चाय से भरे प्याले में बस एक कमी थी,
अब वो उस हाथों की बनी हुई नहीं थी !
मिलो कभी चाय पर फिर कोई किस्से बुनेंगे,
तुम खामोशी से कहना, हम चुपके से सुनेंगे
सुबह की चाय से भी वो ताजगी नहीं आती है,
जो सुबह में तेरी एख झलक पा जाने में आती है।
खबर फैली मोहल्ले में तेरे मेरे इश्क की इस कदर,
लोग चाय की चुस्कियों से ज्यादा हमारा नाम लेने लगे
हम तुम शायरी और एक कप चाय,
ख्वाब भी देखो जान मेरे कितने हसीन है।
यादों में आप और हाथ में चाय हो,
फिर उस सुबह की क्या बात हो।
कैसे कहे कोई नहीं है हमारा, शाम की चाय रोज,
बेसब्री से इंतज़ार जो करती है।
जब सुबह-सुबह तेरे प्यार के नग्में को गुनगुनाता हूं,
लब मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूं।
सुबह की शुरूआत हो, तुमसे पहली बात हो,
चाय से हो दिन मेरा, और तुमसे मेरी रात हो।
आज फिर चाय बनाते हुए वो याद आया
आज फिर चाय में पत्ती नहीं डाली मैं ने
एक कप चाय और तन्हाई की बात, हर दिल को मिलती है राहत की सौगात।
हर घूंट में सुकून, हर चुस्की में जज़्बात, चाय के बिना क्या होती है ज़िंदगी की बात?
महोब्बत में तन्हाई अच्छी नहीं लगती
चाय कभी बिना चीनी के नहीं बनती
ये जनवरी का महीना और ये सर्द शामें,
काश तुम मेरे पास होते तो एक-एक चाय हो जाती।
चाय की चुस्की के साथ अक्सर कुछ गम भी पीता हूं,
मिठास कम है जिंदगी में मगर जिंदादिली से जीता हूं।
जब सुबह-सुबह तेरे प्यार के नग्में को गुनगुनाता हूं,
लब मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूं।
मिलो कभी चाय पर फिर क़िस्से बुनेंगे,
तुम ख़ामोशी से कहना हम चुपके से सुनेंगे।
एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास डियर
वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है !
होंगे लाखों दीवाने उनके हुस्न के,
हम तो आज भी सुबह की चाय के दीवाने हैं !
हर सुबह की शुरुआत चाय से होती है, दिल की हर बात चाय से कहती है।
ज़िंदगी चाहे जैसी भी हो यार, चाय देती है जीने का आधार।
हाथ में चाय और यादों में आप हो,
फिर उस खुशनुमा सुबह की क्या बात हो।
Main Zoya hoon… kal hi maine ‘Best Pick Up Lines Shayari’ likha tha, aur aaj chay ki khushbu mein mohabbat utaar di hai… Best Tea Par Shayari लिखते-लिखते मुझे एहसास हुआ कि चाय असल में रिश्तों जैसी है। कभी कड़क, कभी फीकी, कभी मिठास से भरी… मगर ज़िंदगी का हिस्सा ज़रूर। शायद इसलिए लोग कहते हैं कि “एक कप चाय बहुत कुछ बदल सकती है। आज मैंने तुम्हें चाय के बहाने मोहब्बत सुनाई, शायद अगली बार मैं “बारिश और प्यार भरी शायरी” ले आऊँ।


